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होली: आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक पुनरुत्थान का महापर्व

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होली केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि भारतीय सनातन परंपरा का वह जीवंत दर्शन है जो मनुष्य को जड़ता से चेतनता की ओर ले जाता है। एक स्टूडेंट काउंसलर के रूप में, मैं इसे मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक सामंजस्य और आध्यात्मिक शुद्धि का सबसे बड़ा माध्यम मानता हूँ। ऐतिहासिक एवं पौराणिक आधार होली का इतिहास सतयुग के उस कालखंड से जुड़ा है जब अधर्म चरम पर था। असुरराज हिरण्यकश्यप के अहंकार को चुनौती देने वाले उसके अपने पुत्र भक्त प्रहलाद की अटूट विष्णु भक्ति ने इस पर्व को जन्म दिया। अपनी बुआ होलिका की गोद में अग्नि में बैठने के बावजूद प्रहलाद का सुरक्षित बचना इस बात का प्रमाण है कि 'सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं'। इसके अतिरिक्त, द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण द्वारा राधा रानी और गोपियों संग खेली गई 'फाग' ने इसे प्रेम और भक्ति के उच्चतम शिखर पर पहुँचाया। मनाने का मूल कारण होली मनाने का शास्त्रीय कारण अधर्म पर धर्म की विजय' का उत्सव है। यह पर्व प्रतीक है कि जब समाज में बुराई रूपी 'होलिका' बढ़ने लगती है, तब विश्वास और भक्ति की शक्ति उसे भस्म कर सत्य की स्थापना करती है। यह वसंत ऋ...