रेगिस्तान का खूंखार सांप: पीवणा सांप का जहर बना सिरदर्द

रेगिस्तान का खूंखार सांप: पीवणा सांप का जहर बना सिरदर्द





राजस्थान के रेगिस्तान में पाया जाने वाला पीवणा सांप इलाके में दहशत का दूसरा नाम बन गया है। पांच साल में इस सांप के दो सौ दस शिकार एम्स जोधपुर आ चुके हैं। पीवणा सांप का जहर इतना खतरनाक है कि दो सौ इंजेक्शन भी इसे उतार नहीं पा रहे हैं।

इस सांप के जहर को उतारने में दवाइयां नाकाम हो रही हैं। इसकी वजह यह है कि सांपों का जहर उतारने के लिए जिन एंटीवेनम को बनाया गया है, उसमें दक्षिण के सांपों का जहर इस्तेमाल किया गया है। दक्षिण के सांप से कई गुना ज्यादा जहरीला होता है रेगिस्तानी सांप। ऐसे में ये एंटीवेनम पीवणा सांप के जहर पर काम नहीं कर पा रहा है।

आमतौर पर जब किसी को सांप काटता है तो इसे पांच से दस एंटीवेनम दिए जाते हैं। इतने में ही जहर अपने आप उतर जाता है। लेकिन पीवणा सांप के शिकार को डेढ़ से दो सौ इंजेक्शन दिए जाने के बाद भी जहर नहीं उतर रहा है।

पीवणा सांप लोगो की छाती पर बैठकर डसता है। वो अपनी सांस के माध्यम से जहर छोड़ता है। इसी वजह से रेगिस्तानी इलाकों में लोग ऊंचाई पर सोते हैं ताकि पीवणा सांप उनकी छाती पर ना बैठ सके।

निष्कर्ष-

पीवणा सांप का जहर एक बड़ी चुनौती बन गया है, जिसका सामना राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में लोग कर रहे हैं। इस सांप के जहर को उतारने में दवाइयां नाकाम हो रही हैं, जिससे लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है। इस समस्या का समाधान निकालने के लिए तुरंत कार्रवाई की आवश्यकता है।

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