सोने की अंगूठी और सन्यासी
सोने की अंगूठी और सन्यासी
एक पुराने शहर में एक सन्यासी रहते थे। वे बहुत ही दयालु और करुणामायी स्वभाव के थे। उनके पास एक जादुई अंगूठी थी। यह अंगूठी साधारण सी दिखती थी, लेकिन इसमें एक अद्भुत शक्ति थी। इस अंगूठी को पहनकर किसी भी चीज़ को सोने में बदला जा सकता था। बस इतना करना था कि उस वस्तु को छूते हुए मन ही मन सोने में बदलने की इच्छा करनी होती थी।
सन्यासी जी इस अंगूठी को बहुत ही सोच-समझकर इस्तेमाल करते थे। वे कभी भी इस शक्ति का दुरुपयोग नहीं करते थे। वे इस अंगूठी का उपयोग केवल जरूरतमंद लोगों की मदद करने के लिए करते थे। जो लोग गरीब और बेसहारा होते थे, सन्यासी जी उन्हें यह अंगूठी पहनाकर कुछ समय के लिए अमीर बना देते थे।
एक दिन, एक युवक सन्यासी जी के आश्रम में आया। वह बहुत ही गरीब था और उसके पास खाने के लिए भी कुछ नहीं था। सन्यासी जी ने उसकी दशा देखकर दया खाकर उसे अंगूठी दे दी। युवक बहुत खुश हुआ और उसने इस अंगूठी की मदद से अपनी और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार ली।
कुछ समय बाद, युवक बहुत अमीर हो गया। धन के मद में चूर होकर वह अहंकारी हो गया और सन्यासी जी को भूल गया। उसने अंगूठी को छिपा लिया और सन्यासी जी को वापस नहीं लौटाई।
सन्यासी जी को युवक की इस हरकत का बिल्कुल भी बुरा नहीं लगा। वे जानते थे कि धन के मोह में लोग क्या-क्या कर सकते हैं। वे युवक को ढूंढने निकल पड़े। काफी खोजबीन के बाद उन्हें युवक मिल गया। सन्यासी जी ने युवक से प्यार से कहा, "बेटा, यह अंगूठी तुम्हारे पास इसलिए थी ताकि तुम अपनी और अपने परिवार की मदद कर सको। अब तुम्हें इस अंगूठी की जरूरत नहीं है। इसे मेरे पास वापस कर दो।"
युवक शर्मिंदा हुआ और उसने अंगूठी सन्यासी जी को वापस दे दी। सन्यासी जी ने अंगूठी लेकर दूसरे गरीब व्यक्ति को दे दी।
इस तरह सन्यासी जी ने अपनी अंगूठी की मदद से कई लोगों की जिंदगी बदल दी। वे जानते थे कि धन का सही उपयोग कैसे करना है। उन्होंने लोगों को सिखाया कि धन का लालच बुरा है और हमें हमेशा दूसरों की मदद करनी चाहिए।

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