प्रलय की घड़ी: मानवता के विनाश के सबसे करीब

 प्रलय की घड़ी: मानवता के विनाश के सबसे करीब;बस कुछ पल दूर, दुनिया महाविनाश के कगार पर.......





वाशिंगटन: परमाणु वैज्ञानिकों ने 78 साल पहले एक अनोखी घड़ी बनाई थी, जिसे डूम्सडे क्लॉक (प्रलय की घड़ी) नाम दिया गया था। यह इस बात का एक प्रतीकात्मक प्रयास था कि इंसान दुनिया को नष्ट करने के कितने करीब है। मंगलवार को इस घड़ी को फिर से सेट करके आधी रात से 89 सेकंड पहले कर दिया गया है। यानी, दुनिया सर्वनाश के कगार पर है।

क्या है डूम्सडे क्लॉक?

शिकागो स्थित गैर लाभकारी संस्था बुलेटिन ऑफ द एटामिक साइंटिस्ट्स ने 1947 में द्वितीय विश्व युद्ध बाद शीत युद्ध के तनाव के दौरान घड़ी बनाई थी, ताकि लोगों को चेतावनी दी जा सके की मानव जाति दुनिया को नष्ट करने के कितनी करीब थी।

क्यों बढ़ रहा है खतरा?

बुलेटिन के विज्ञान और सुरक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डैनियल होल्ज ने मंगलवार को कहा, 'हमने घड़ी को आधी रात के करीब सेट किया है क्योंकि हम परमाणु जोखिम, जलवायु परिवर्तन, जैविक खतरों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी विघटनकारी प्रौद्योगिकियों में प्रगति सहित वैश्विक चुनौतियों पर पर्याप्त, सकारात्मक प्रगति नहीं देखते हैं।' उन्होंने कहा कि 'जिन देशों के पास परमाणु हथियार हैं, वे अपने शस्त्रागार के आकार और भूमिका को बढ़ा रहे हैं। ऐसे हथियारों में सैकड़ों अरबों डॉलर का निवेश कर रहे हैं जो सभ्यता को कई बार नष्ट कर सकते हैं।'

भारत पर मंडराता खतरा:-

भारत भी इस खतरे से अछूता नहीं है। हमारे पड़ोसी देशों के पास भी परमाणु हथियार हैं, और उनके साथ हमारे संबंध भी तनावपूर्ण हैं। ऐसे में, भारत को भी इस खतरे के प्रति सचेत रहने और इससे निपटने के लिए तैयार रहने की आवश्यकता है।

क्या हम कर सकते हैं कुछ?

अभी भी समय है कि हम इस खतरे को कम करने के लिए कुछ कर सकते हैं। सबसे पहले, हमें परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना होगा। दूसरा, हमें जलवायु परिवर्तन के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी। तीसरा, हमें जैविक हथियारों के विकास को रोकना होगा। और चौथा, हमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास को सावधानीपूर्वक प्रबंधित करना होगा।

यह सच है कि यह एक कठिन काम है, लेकिन यह असंभव नहीं है। अगर हम सब मिलकर प्रयास करें तो हम दुनिया को महाविनाश से बचा सकते हैं।

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