सउदी अरब में 8,000 साल पुराने नवपाषाण मंदिर की खोज

सउदी अरब में 8,000 साल पुराने नवपाषाण मंदिर की खोज





सऊदी अरब के रियाद के दक्षिण-पश्चिम में स्थित अल-फव में पुरातात्विक उत्खनन से 8,000 साल पुराने नवपाषाण मंदिर और एक प्राचीन शहर की महत्वपूर्ण खोज हुई है। यह विशाल खोज अरब प्रायद्वीप में रहने वाली प्राचीन सभ्यताओं पर नया प्रकाश डालती है।

प्रमुख खोजें:

 प्राचीन मंदिर: तुवाईक पर्वत (जिसे खशेम करिया भी कहा जाता है) के किनारे एक पत्थर के मंदिर के अवशेष मिले हैं, जिसके बारे में माना जाता है कि यह अनुष्ठानों और समारोहों का केंद्र था। हालांकि मंदिर का अधिकांश हिस्सा नष्ट हो गया है, पत्थर के अवशेष और एक वेदी के कुछ हिस्से प्राचीन पूजा पद्धतियों के पुख्ता सबूत पेश करते हैं।

 देवता कहल: भक्ति संबंधी शिलालेख मिले हैं, जिनमें से एक जाबल लाहाक अभयारण्य में कहल को संबोधित है, जिसे अल-फव के एक स्थानीय देवता के रूप में पहचाना गया है। ये शिलालेख समुदाय की धार्मिक मान्यताओं के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं। कुछ शोधकर्ता इन शिलालेखों के आधार पर अल-जरहा शहर के साथ संभावित व्यापारिक और आर्थिक संबंधों या यहां तक कि धार्मिक सहिष्णुता के बारे में भी अनुमान लगाते हैं।

 नवपाषाण बस्ती और कब्रें: पुरातात्विक स्थल पर 8,000 साल पुरानी नवपाषाण मानव बस्तियों के निशान और विभिन्न अवधियों की 2,807 कब्रें भी मिली हैं, जिन्हें छह अलग-अलग समूहों में वर्गीकृत किया गया है। ये निष्कर्ष प्राचीन अल-फव के दफन प्रथाओं और सामाजिक संरचनाओं में बहुमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं।

 योजनाबद्ध शहर: मंदिर के अलावा, पुरातत्वविदों ने एक जटिल और सुव्यवस्थित शहर के अस्तित्व की पुष्टि की। खोजों में चार स्मारकीय इमारतों की नींव शामिल है, जिनमें से कुछ में कोने वाले टावर, आंतरिक योजनाएं और खुले आंगन हैं, जो व्यापार कारवां के लिए उनके विश्राम स्थल के रूप में उपयोग का सुझाव देते हैं।

 उन्नत बुनियादी ढांचा: नहरों, पानी के कुंडों और सैकड़ों गड्ढों से युक्त एक जटिल सिंचाई प्रणाली भी उजागर की गई, जो शुष्क वातावरण में परिष्कृत इंजीनियरिंग को दर्शाती है।

संदर्भ और महत्व:

यह खोज सऊदी अरब विरासत आयोग के तहत सऊदी अरब और फ्रांसीसी पुरातत्वविदों की एक संयुक्त टीम द्वारा की गई थी। अल-फव में मिले निष्कर्ष बताते हैं कि मंदिरों, अनुष्ठानों और मूर्ति पूजा की एक संस्कृति इस क्षेत्र में बाद की अखंड धार्मिक प्रथाओं से पहले मौजूद थी। यह स्थल, जो 40 से अधिक वर्षों से पुरातात्विक अध्ययन का केंद्र रहा है, एक समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का एक व्यापक दृश्य प्रस्तुत करता है जो हजारों साल पुराना है। अल-फव पुरातात्विक क्षेत्र को यूनेस्को द्वारा विश्व विरासत स्थल के रूप में भी मान्यता प्राप्त है।

यह पुरातात्विक रहस्योद्घाटन प्राचीन अरब के खानाबदोश जनजातियों और शुरुआती निवासियों के दैनिक जीवन, धार्मिक प्रथाओं और सामाजिक संगठन में अमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान करता है, जो इस क्षेत्र के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परिदृश्य की पिछली समझ को चुनौती देता है।

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