आपके बच्चों की पाठ्यपुस्तकों से क्या गायब है? एनसीईआरटी के मोदी-युग के संशोधनों पर एक गहन विश्लेषण
आपके बच्चों की पाठ्यपुस्तकों से क्या गायब है? एनसीईआरटी के मोदी-युग के संशोधनों पर एक गहन विश्लेषण
भारत के स्कूली पाठ्यक्रम को आकार देने वाली स्वायत्त संस्था, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी पाठ्यपुस्तकों में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इन बदलावों को सरकार ने कोविड-19 महामारी के बाद छात्रों का तनाव कम करने के लिए 'पाठ्यक्रम युक्तिकरण' (rationalization) का हिस्सा बताया है। हालांकि, कई शिक्षाविदों और आलोचकों का मानना है कि ये परिवर्तन सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) की वैचारिक दिशा के अनुरूप हैं।
आइए, उन प्रमुख बिंदुओं पर एक नज़र डालते हैं जो आपके बच्चों की किताबों से गायब कर दिए गए हैं:
इतिहास और सामाजिक विज्ञान से हटाए गए अंश:
मुगल और दिल्ली सल्तनत का इतिहास:कक्षा 12वीं की इतिहास की किताब से मुगल दरबारों और दिल्ली सल्तनत से जुड़े पूरे अध्याय हटा दिए गए हैं। अकबर जैसे शासकों के विवरणों को भी बदल दिया गया है, और टीपू सुल्तान का उल्लेख भी पाठ्यक्रम से हटा दिया गया है।
बाबरी मस्जिद का उल्लेख: पाठ्यपुस्तकों में "बाबरी मस्जिद" शब्द को हटाकर "तीन-गुंबद वाली संरचना" लिख दिया गया है। इसके अलावा, 1992 के विध्वंस और उसके बाद हुए सांप्रदायिक दंगों के विस्तृत विवरण को भी हटा दिया गया है।
गांधीजी और गोडसे: महात्मा गांधी की हत्या के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर लगे प्रतिबंध का जिक्र अब किताबों में नहीं है। साथ ही, नाथूराम गोडसे की राजनीतिक पृष्ठभूमि से संबंधित अंशों को भी धुंधला कर दिया गया है।
गुजरात दंगे और मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट: 2002 के गुजरात दंगों से जुड़े अनुभागों को हटा दिया गया है। इनमें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की वह रिपोर्ट भी शामिल थी, जिसने उस समय की सरकार को दोषी ठहराया था।
विज्ञान और अन्य विषयों से हुई कटौती:
डार्विन का विकासवाद का सिद्धांत: विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों से चार्ल्स डार्विन के विकासवाद के सिद्धांत को हटाना सबसे विवादास्पद बदलावों में से एक है। जीव विज्ञान की नींव माने जाने वाले इस सिद्धांत को हटाने से वैज्ञानिक समुदाय में गहरी चिंता है।
धर्मनिरपेक्षता और संघवाद:कक्षा 11वीं और 12वीं की राजनीति विज्ञान की किताबों से धर्मनिरपेक्षता (secularism) और संघवाद (federalism) पर आधारित अध्याय हटा दिए गए हैं। ये दोनों अवधारणाएं भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, और इन्हें हटाने से छात्रों की संवैधानिक समझ प्रभावित हो सकती है।
पर्यावरण और जातिगत भेदभाव: कुछ पर्यावरण संबंधी मुद्दों और जातिगत भेदभाव पर आधारित अंशों को भी हटा दिया गया है।
पहले शिक्षा मंत्री: भारत के पहले शिक्षा मंत्री के रूप में मौलाना अबुल कलाम आज़ाद के नाम का उल्लेख भी अब कुछ जगहों से हटा दिया गया है।
ये बदलाव न केवल छात्रों के पाठ्यक्रम को हल्का कर रहे हैं, बल्कि उन्हें भारत के इतिहास, समाज और विज्ञान के कुछ सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं से भी दूर कर रहे हैं। शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं है, बल्कि छात्रों में एक संतुलित और आलोचनात्मक दृष्टिकोण विकसित करना भी है। इन संशोधनों से यह सवाल उठता है कि क्या हम अपने बच्चों को उनके देश और दुनिया की पूरी तस्वीर दिखा रहे हैं, या सिर्फ एक चुनी हुई कहानी सुना रहे हैं।
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