तनाव का बोझ: छात्रों के भविष्य पर मंडराता खतरा
तनाव का बोझ: छात्रों के भविष्य पर मंडराता खतरा
**गुरुकुल विश्वविद्यालय के अध्यक्ष ने पूछा सवाल, छात्र काउंसलर अमन मान ने दिए जवाब**
हाल ही में, गुरुकुल विश्वविद्यालय में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर एक महत्वपूर्ण चर्चा आयोजित की गई। इस चर्चा में, विश्वविद्यालय के अध्यक्ष ने छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव और इसके शारीरिक प्रभावों को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की, और छात्र काउंसलर **अमन मान** से इस गंभीर मुद्दे पर उनकी राय मांगी। यह बातचीत छात्रों के लिए एक वेक-अप कॉल थी।
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**अध्यक्ष:** "अमन मान जी, आज के छात्र जीवन को अक्सर एक 'रेस' के रूप में देखा जाता है। इस रेस में हारने का डर छात्रों में किस तरह के मानसिक और शारीरिक लक्षण पैदा करता है?"
**अमन मान:** "यह डर बहुत गहरा होता है। हारने का डर लगातार चिंता और बेचैनी पैदा करता है, जो धीरे-धीरे एक शारीरिक प्रतिक्रिया में बदल जाती है। छात्र अक्सर पेट में ऐंठन, सिरदर्द, या पसीना आने की शिकायत करते हैं, खासकर परीक्षाओं से पहले। ये शारीरिक लक्षण उनके मस्तिष्क द्वारा भेजे गए खतरे के संकेत हैं। अगर इस डर को संभाला न जाए, तो यह डिप्रेशन और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।"
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**अध्यक्ष:** "क्या डिजिटल दुनिया और सोशल मीडिया इस तनाव को और बढ़ा रहे हैं? छात्र अक्सर 'FOMO' (Fear of Missing Out) या दूसरों से खुद की तुलना करने के दबाव में रहते हैं।"
**अमन मान:** "बिल्कुल। सोशल मीडिया एक तुलना का मैदान बन गया है। जब छात्र देखते हैं कि उनके दोस्त विदेश में पढ़ रहे हैं या शानदार जीवन जी रहे हैं, तो उनमें असुरक्षा और अपर्याप्तता की भावना पैदा होती है। यह 'FOMO' एक प्रकार का मानसिक तनाव है जो नींद की कमी, एकाग्रता में कमी और यहां तक कि खाने की आदतों में बदलाव का कारण बन सकता है। यह बाहरी दबाव एक आंतरिक संघर्ष बन जाता है, जिससे उनकी आत्म-सम्मान को गहरा नुकसान पहुँचता है।"
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**अध्यक्ष:** "तनाव के कारण होने वाली सबसे आम गलतियाँ क्या हैं जो छात्र करते हैं, और उन्हें इनसे कैसे बचना चाहिए?"
**अमन मान:** "सबसे आम गलती है कि छात्र अपने तनाव को दबाते हैं। उन्हें लगता है कि तनाव महसूस करना कमजोरी की निशानी है। दूसरी गलती यह है कि वे खुद को पढ़ाई में इतना व्यस्त कर लेते हैं कि वे आराम और नींद को त्याग देते हैं। इससे उनकी शारीरिक और मानसिक ऊर्जा पूरी तरह खत्म हो जाती है।
इससे बचने के लिए, छात्रों को अपने जीवन में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव लाने चाहिए:
* **अपने लिए समय निकालें:** दिन में कम से कम 20-30 मिनट पूरी तरह से खुद के लिए दें। इस समय में आप कुछ भी रचनात्मक कर सकते हैं—जैसे पेंटिंग करना, संगीत सुनना, या बस शांत बैठना।
* **शारीरिक गतिविधि को प्राथमिकता दें:** नियमित व्यायाम, योग, या कोई भी खेल मानसिक तनाव को कम करने का सबसे अच्छा तरीका है। यह तनाव हार्मोन को कम करके 'फील-गुड' हार्मोन एंडोर्फिन को बढ़ाता है।
* **डिजिटल डिटॉक्स:** सोशल मीडिया से थोड़ी दूरी बनाना सीखें। कुछ घंटों या दिनों के लिए अपने फोन को दूर रखें और वास्तविक दुनिया से जुड़ें।
* **सहायता लें:** सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मदद मांगने में संकोच न करें। अपने दोस्तों, परिवार या कॉलेज के काउंसलर से बात करें। याद रखें, बातचीत तनाव का बोझ हल्का करती है।"
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### निष्कर्ष और नई पीढ़ी के लिए संदेश
इस गहन चर्चा के बाद, यह स्पष्ट हो गया कि छात्रों के बीच मानसिक तनाव एक गंभीर और अनदेखा मुद्दा है। अमन मान ने बताया कि यह केवल एक मानसिक समस्या नहीं, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य का भी प्रश्न है।
अध्यक्ष ने अमन मान का आभार व्यक्त करते हुए कहा, "हमें एक ऐसे वातावरण का निर्माण करना होगा जहाँ छात्र शैक्षणिक सफलता के साथ-साथ मानसिक और शारीरिक रूप से भी स्वस्थ रह सकें। उनकी भलाई हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।"
अमन मान ने अपनी बात का अंत एक सशक्त संदेश के साथ किया, जो विशेष रूप से आज की नई पीढ़ी के लिए था:
"मेरे प्यारे छात्रों, जीवन एक दौड़ नहीं है, यह एक यात्रा है। यह मायने नहीं रखता कि आप सबसे तेज दौड़ते हैं, बल्कि यह मायने रखता है कि आप अपनी यात्रा को कैसे जीते हैं। अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें, अपने मन की बात सुनें, और याद रखें कि आप अपनी सफलताओं से कहीं ज्यादा हैं। आप एक इंसान हैं, मशीन नहीं।"

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