शिक्षा :एक महत्वपूर्ण कर्तव्य
तिरुवनंतपुरम के एक साधारण से गांव कुमारपुरम में जन्मे सुरेंद्रन को दुनिया आज अभिनेता इंद्रंस के नाम से जानती है। बचपन में वे कुशाग्र बुद्धि थे और कक्षा की पहली बेंच पर बैठकर पढ़ाई में अव्वल आया करते थे। आंखों में भविष्य के कई सपने तैरते थे, लेकिन घर के हालात बेहद तंग थे। सात भाई-बहनों का बड़ा परिवार और सीमित साधन। चौथी कक्षा तक पहुंचते-पहुंचते गरीबी इस कदर आड़े आई कि परिवार स्कूल की वर्दी और कॉपियों का खर्च भी नहीं उठा सका। हालात से मजबूर होकर एक मेधावी बालक को बस्ता खूंटी पर टांगना पड़ा। शिक्षा छूटने के बाद उन्होंने जीवन यापन के लिए सिलाई का काम सीखा। कई वर्षों तक वे दरजी की दुकान पर कैंची और सुई-धागे से कपड़े सिलते रहे। यही हुनर उन्हें सिनेमा की दहलीज तक ले गया। उन्होंने फिल्मों में बतौर कॉस्ट्यूम डिजाइनर काम शुरू किया और कलाकारों के कपड़े तैयार करने लगे। कपड़ों की सिलाई करते-करते उनके भीतर छिपे संवेदनशील कलाकार को मंच मिलने लगा। 1980 के दशक में उन्हें छोटे-मोटे हास्य दृश्य मिलने शुरू हुए। अपनी छरहरी काया और अनोखी कॉमिक टाइमिंग के कारण वे दर्शकों के चहेते तो बने, लेकिन सिनेमा ने...