सुपर अल नीनो की दस्तक: वैश्विक तापमान में रिकॉर्ड बढ़ोतरी की चेतावनी
प्रशांत महासागर में विकसित हो रहा 'अल नीनो' अब एक विकराल रूप धारण करने की ओर अग्रसर है। वैज्ञानिकों और जलवायु विशेषज्ञों के अनुसार, यह मौसमी घटना वर्ष 2026 के उत्तरार्ध में और अधिक तीव्र होकर नवंबर-दिसंबर तक अपने चरम पर पहुंच सकती है। इस संभावित "सुपर अल नीनो" के कारण आने वाले महीनों में वैश्विक तापमान अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचने की आशंका है।
महासागर के भीतर छिपा अभूतपूर्व ताप
भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान पहले ही खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी चिंता समुद्र की सतह के नीचे संचित भारी ऊष्मा है, जो धीरे-धीरे सतह की ओर बढ़ रही है।
पुराने रिकॉर्ड टूटे: प्रशांत महासागर के भीतर जमा यह ऊष्मा 1982-83, 1997-98 और 2015-16 के ऐतिहासिक अल नीनो आयोजनों के स्तर को पार कर चुकी है।
अभूतपूर्व गति: जलवायु विश्लेषक कॉलिन मैकार्थी के मुताबिक, वार्मिंग की तेज रफ्तार, अनुमानित चरम तीव्रता और महासागर में संचित ऊष्मा की मात्रा—सभी मामलों में यह घटना नए रिकॉर्ड बना रही है।
2 डिग्री सेल्सियस की दहलीज के करीब धरती
अल नीनो मध्य और पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में असामान्य रूप से गर्म पानी के फैलने से उत्पन्न होता है, जो वायुमंडलीय परिसंचरण को वैश्विक स्तर पर प्रभावित करता है। मानव-जनित जलवायु परिवर्तन और इस शक्तिशाली अल नीनो का संयुक्त प्रभाव वर्ष 2027 की शुरुआत में वैश्विक औसत तापमान को पूर्व-औद्योगिक स्तर से लगभग 2 डिग्री सेल्सियस ऊपर धकेल सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह स्थिति पृथ्वी को ऐसे जलवायु क्षेत्र में ले जाएगी, जो लाखों वर्षों में नहीं देखा गया।
चरम मौसम और अनिश्चितताओं का दौर
आगामी 12 से 18 महीनों में दुनिया भर में चरम मौसमी घटनाओं में वृद्धि देखी जा सकती है:
भीषण लू और जंगलों में आग का बढ़ता जोखिम
मानसून के पैटर्न में अप्रत्याशित बदलाव और अनियमित वर्षा
कुछ क्षेत्रों में गंभीर सूखा, जबकि अन्य हिस्सों में विनाशकारी बाढ़
उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की आवृत्ति और तीव्रता में परिवर्तन
हालांकि विभिन्न क्षेत्रों पर इसका सटीक प्रभाव अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन प्रशांत महासागर में बढ़ता तापमान स्पष्ट संकेत दे रहा है कि दुनिया को आने वाले समय में गंभीर जलवायु उथल-पुथल के लिए तैयार रहना होगा।

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